ख्वाब पूरा हो जाये तो वो ख्वाब क्या
हम सामने आ जाये तो तन्हाई क्या
ज़माना ख़राब है क्या कहे हम
चुप रह जाये तो ही दुनियादारी है..
जो समझदार है उनसे क्या कहें
और ,जो नासमझ है उनसे कैसे कहे ...!!!
Sunday, April 8, 2012
मैंने पूछा कब मिलते हो ?
बोले हमें फुर्सत नहीं है
मैंने कहा बहुत मसरूफ हो ?
बोले काम खूब है
खाई ठोकर फिर मिलना भी याद आ गया, काम भी खत्म हो गए .
हंस के हमने कहा "क्या खूब कहते हो ,कभी फुर्सत नहीं तो कभी खूब मिलते हो" .